Monday, January 15, 2018

मुन्नार में कभी चलती थी मोनो रेल

कानन देवन हिल प्लांटेशन का दफ्तर जो कभी लाइट रेलवे का स्टेशन हुआ करता था। 
मुन्नार प्रसिद्ध है अपने हरे भरे चाय के बगानों के लिए। यहां चाय की खेती सैकड़ो साल से हो रही है। अब मुन्नार में जितने भी चाय के बगान हैं वे टाटा समूह के अधीन आते हैं। पर एक मजेदार और बात ऐतिहासिक तथ्य है कि मुन्नार में देश की पहली मोनो रेल चली थी।

भले ही आज मुन्नार रेल से संपर्क में नहीं है पर किसी जमाने में यहां चाय के परिवहन के लिए रेल चलाई गई थी।  तो चलिए चलते उलटते हैं अतीत  के कुछ पन्ने। मुन्नार में 1902 से 1908 के बीच कुंडाला वैली मोनो रेल का संचालन किया गया। हम मुन्नार भ्रमण के दौरान मुन्नार बाजार से कुंडाला लेक और टॉप स्टेशन तक के नजारे देखने गए। पर इन्ही नजारों के बीच कभी मोनो रेल चलती थी। इसका संचालन कानन देवन चाय कंपनी द्वारा किया जाता था। इसका निर्माण 1902 में मुन्नार से टॉप स्टेशन के बीच किया गया। 

इसे रेलवे को खास तौर पर चाय के परिवहन के लिए संचालित किया जा रहा था। इसके ट्रैक को मुन्नार से टाप स्टेशन को जा रही सड़क पर ही किनारे किनारे बिछाया गया था। मुन्नार में अब उस रेल को देखने वाला कोई नहीं बचा। पर स्थानीय लोगों को मालूम है कि कभी यहां पर रेल चलती थी। यह मोनो रेल भी तकनीक के लिहाज से पटियाला स्टेट मोनो रेल की तरह इविंग सिस्टम पर भी आधारित थी।

क्यों जरूरत पड़ी मोनो रेल की। दरअसल 1902 तक टाटा टी कंपनी देश के प्रसिद्ध चाय उत्पादक कंपनियों में शुमार हो चुकी थी। पूरे देश में उसकी कुल 16 ताय फैक्ट्रियां थीं। मुन्नार मेंचाय के उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा हर साल ब्रिटेन भेजा जाता था। इसके लिए तमिलनाडु के तूतीकोरीन बंदरगाह तक ताय पहुंचाई जाती थी। पर तब चाय के परिवहन के लिए तेज गति वाले साधनों का अभाव था। तब कंपनी के जनरल मैनेजर एम माइम ने एक मोनोरेल  स्थापित करने की योजना बनाई। इसे मुन्नार वाया मुट्टुपेट्टी होते हुए टॉप स्टेशन तक चलाया गया। 
मुन्नार में एलुमिनियम ब्रिज - कभी इस पुल से होकर गुजरती थी लाइट रेल 

बैल खींचते थे मोनो रेल
इस मोनो रेल को संचालित करने के लिए 500 बैल बहाल किए गए। इन बैलों की देखभाल के लिए एक वेटनरी डाक्टर और दो सहायक भी इंग्लैंड से बुलाए गए। मतलब साफ है कि इस मोनो रेल को कोई लोकोमोटिव नहीं खींचता था।  इस मोनो रेल का एक छोटा पहिया लोहे की पटरी पर चलता था तो दूसरा बड़े आकार का पहिया सड़क पर।  टॉप स्टेशन से चाय को रोपवे से कोटागुड्डी तक पहले लाया जाता था। इसे बाटम स्टेशन भी कहा जाता था। बॉटम स्टेशन से चाय को मोनो रेल से मुन्नार लाया जाता था। फिर यहां से चाय पैक होकर तूतीकोरीन बंदरगाह तक जाती थी। चाय की पैकिंग के लिए जो कंटेनर इस्तेमाल किए जाते थे वे इंपेरियल चेस्ट कहलाते थे जो ब्रिटेन से लाए जाते थे।

1908 में मोनो रेल की जगह लाइट रेल
पर 1908 में मोनो रेल को लाइट रेलवे में बदल दिया गया। इसका उद्देश्य था चाय की ज्यादा तेज गति से ढुलाई। मोनो रेल की जगह मुन्नार बाजार से टाप स्टेशन तक 32 किलोमीटर के मार्ग में 2 फीट यानी 610 एमएम की पटरियां बिछाई गईं। रेलवे के संचालन के लिए स्टीम लोकोमोटिव मंगाए गए। तब रास्ते में इसके दो स्टेशन बनाए गए। पालार और मुट्टुपेडी में इसका स्टेशन हुआ करता था। फिलहाल मुन्नार बाजार में काननदेवन हिल टी प्लांटेशन का जो क्षेत्रीय कार्यालय है, वह कभी लाइट रेलवे का स्टेशन हुआ करता था। इसके साथ ही मुख्य दफ्तर भी यहीं था। चाय को उतारने के लिए जो प्लेटफार्म का इस्तेमाल किया जाता था वहां पर अब सड़क बन गई है। इसके बगल में छोटी बह रही नदी पर एक एलुमिनियम का पुल आज भी दिखाई देता है। इस पुल से होकर ही कभी लाइट रेलवे गुजरती थी। पर अब उस पुल के ऊपर सड़क बना दी गई है। हालांकि वह पुल अभी भी बेहतर हालत में है।  

और बाढ़ में सब कुछ बर्बाद हो गया

1924 में यह लाइट रेलवे भी बंद हो गई। कैसे बंद हुई इसकी दास्तां दुखद है। दरअसल 1924 में मुन्नार इलाके में बाढ़ के रुप में प्रकृति का कहर बरपा। इस बाढ़ ने मुन्नार से टाप स्टेशन तक कुंडाला वैली रेलवे के ट्रैक और रोलिंग स्टाक को बरबाद कर दिया। बरबादी इतनी भीषण थी, बाढ़ का असर खत्म होने के बाद इस रेलवे लाइन को फिर से नहीं बनाया जा सका। जुलाई 1924 में आए इस बाढ़ को केरल में ग्रेट फ्लड आफ 99 कहते हैं। मलयालम कैलेंडर में यह 1099 का साल था। खास तौर पर पेरियार नदी ने काफी कहर ढाया था। एर्नाकुलम, इडुकी, कोट्टायम, त्रिशूर, अलपुजा आदि जिलों में बाढ़ से काफी बरबादी हुई थी।  

इस तरह कुंडाला वैली लाइट रेलवे इतिहास के पन्नों में समा गई। अब मुन्नार में मोनो रेल या लाइट रेलवे की स्मृति में कुछ दिखाई नहीं देता। दिखती है तो बस चाय की बगानें। 
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
( KUNDALA VALLY MONO RAIL, MUNNAR, TATA TEA ) 

 
पालार में कभी लाइट रेलवे का स्टेशन हुआ करता था। 



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