Tuesday, August 30, 2016

नार्थ बे – अंदमान का अनमोल रतन ((23))

आपने कभी 20 रुपये के नोट को गौर से देखा है। एक बार फिर देखिए। इसको पीछे की ओर पलट कर देखिए। इसके मध्य में  एक तस्वीर नजर आती है। ये तस्वीर अंदमान निकोबार द्वीप समूह के एक द्वीप नार्थ बे की है। आखिर क्यों 20 रुपये के नोट पर इस द्वीप की तस्वीर प्रकाशित की गई है। इसलिए कि नार्थ बे अंदमान का एक कोरल द्वीप है। यहां द्वीप के पास समंदर में बहुमूल्य कोरल पाए जाते हैं। इसलिए ये छोटा सा द्वीप अंदमान निकोबार द्वीप समूह का अनमोल रतन है।

गोल मिर्च और दालचीनी की खेती : नार्थ बे आकार में एक छोटा सा द्वीप है, पर इस द्वीप पर आबादी रहती है। कोई 40 परिवार इस द्वीप पर ही रहते हैं। ये लोग द्वीप के जमीन पर खेती बाड़ी करते हैं। खेती की बात करें तो इस द्वीप पर गोल मिर्च ( काली मिर्च ), दाल चीनी, तेजपत्ता जैसे मसालों की खेती होती है। अगर नार्थ बे से आप इन मसालों को खरीदें तो इनके आर्गेनिक होने की गारंटी तो है ही साथ ही ये सस्ते भी मिलते हैं। इसलिए अगर आप यहां पहुंचे हैं तो मसाले जरूर खरीदें। जब बोट से नार्थ बे पहुंचते हैं तो एक बोर्ड दिखाई देता है -  वेलकम टू नार्थ बे,  नार्थ बे में आपका स्वागत है।

 प्रवेश टिकट दस रुपये का - इस बीच पर आने वाले सैलानियों से 10 रुपये प्रवेश टिकट लिया जाता है। इस प्रवेश टिकट के एवज में द्वीप सैलानियों के लिए सुविधाओं का प्रबंधन किया जाता है।  जैसे बैठने के लिए इको फ्रेंडली लकड़ी की बेंच। बारिश से बचने के लिए शेड्स और शौचालय आदि का प्रबंधन। इन सबके लिए आपको अलग से कोई शुल्क नहीं देना पड़ता है।

छोटा सा बाजार रहता है गुलजार - नार्थ बे में छोटा सा बाजार दिन में गुलजार रहता है। इस बाजार में आपको दोपहर का खाना चावल की थाली मिल सकती है। चाय और पकौड़े भी मिल जाते हैं। मैं पहुंचा तब बारिश हो रही थी लिहाजा पकौड़े खाना काफी भला लगा। एक अम्मा मिट्टी तेल के स्टोव पर पकौड़े तल रही थीं। बीस रुपये में एक प्लेट पकौड़ा। द्वीप के मुताबिक महंगाई नहीं दिखाई देती है। द्वीप पर टी शर्ट की कई दुकानें सजी हैं। अंदमान पर केंद्रित कई तरह के टी शर्ट बिक रहे हैं। महज सौ रुपये में। मैं अपने लिए ऐसे दो टी शर्ट पहले ही ले चुका हूं। बेटे अनादि के साइज के दो टी शर्ट खरीदता हूं। वह भी सौ-सौ रुपये में। उम्मीद है अनादि इन्हें देखकर खुश हो जाएंगे।

कैसे पहुंचे - नार्थ बे का सफर पोर्ट ब्लेयर के अबरडीन जेट्टी से एक घंटे का है। अगर स्पीड बोट से जाएं तो और भी कम समय लगता है। यह द्वीप मरीना पार्क से कोई दो किलोमीटर की दूरी पर है। वैसे किसी समय में नार्थ बे पहुंचने के लिए बंबू फ्लैट द्वीप से सड़क मार्ग उपलब्ध था, पर सुनामी के दौरान 2004 में वह सड़क तबाह हो गई। मरीना पार्क से नार्थ बे जाने के लिए बोट जेट्टि सुबह 9 से 12 बजे दोपहर के बीच में चलती हैं इसलिए आप सुबह सुबह ही पहुंच जाएं।

( NORTH BAY, LIGHT HOUSE, PORT BLAIR, ANDAMAN, SEA WALK, JET SKII, SNORKELING, SPEED WATER BOAT )
नार्थ बे में वाटर स्पोर्ट्स का मजा लेते सैलानी। 
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Sunday, August 28, 2016

अंदमान में आदिवासियों की अनूठी दुनिया ((22))

पोर्ट ब्लेयर स्थित एंथ्रोपोलाजिकल म्युजिम। प्रवेश टिकट 20 रुपये है...
आपको पता है दुनिया में आज भी 125 घुमक्कड़ जातियां हैं। इनमें 5 जातियां अंडमान में हैं जो आज भी अपना भोजन संग्रह करते पेट भरती हैं। इन्हें नेटिग्रो वर्ग में रखा गया है। अंदमान के ग्रेट अंडमान और लिट्टल अंडमान में ऐसे लोग रहते हैं। जारवा, ओंगी, शैंपेन जैसे लोग आज भी आदिम जीवन जीते हैं। ओंगी मधु निकालते हैं तो जारवा लोग तीर धनुष से मछली पकड़ते हैं। जारवा लोग बॉडी पेंटिंग के भी शौकीन होते हैं। इस तरह की तमाम रोचक जानकारियों के लिए आपको पहुंचना होगा पोर्ट ब्लेयर के एंथ्रोपोलाजिकल म्युजियम में। ये म्युजियम अबरडीन बाजार से मिड्ल प्वाइंट की ओर आगे बढ़ने पर पोर्ट ब्लेयर के मुख्य डाकघर के पास स्थित है। प्रवेश के लिए टिकट 20 रुपये का है। संग्रहालय में एक बिक्रय काउंटर भी है जहां आप किताबें और अन्य सामग्री खरीद सकते हैं। संग्रहालय का भवन तीन मंजिला है। इसमें काफी जानकारियां समेटी गई हैं। अंदर फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी पर निषेध है।
शोंपेन जनजाति के लोग 

शर्मीले शोंपेन की अलग दुनिया - शोंपेन लोग मोंगोलाएड नस्ल के हैं। ये ग्रेट निकोबार में रहते हैं। ये लोग आज भी फायर ड्रिल करके आग जलाते हैं। यानी लकड़ी में छेद करके आग जलाने की तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। इनके चमड़े का रंग पीला भूरा और बाल लंबे होते हैं। इनकी पलकें छोटी, नाक चपटी और होंठ मोटे होते हैं। निकोबार में रहने वाले शोंपेन लोग मलेशियाई और इंडोनेशियाई लोगों से मेल खाते हैं। निकोबार में कुल 22 द्वीप हैं जिनपर इनका निवास है। शोंपेन लोग ग्रेट निकोबार के मुख्यालय में कभी कभी सरकारी मदद प्राप्त करने के लिए आते हैं। वे लोग आम तौर पर शर्मीले स्वभाव के होते हैं। शोंपेन लोग अक्सर नदी या झरनों के पास छोटी छोटी झोपड़ियां बनाकर रहते हैं। सबसे बुजुर्ग आदमी इनके समाज का मुखिया होता है। इनमें एक विवाह और बहु विवाह प्रथा कायम है। शोंपन लोगों की कुल संख्या 400 के करीब रह गई है।

मुश्किल है सेंटिनिलीज को समझाना - सेंटिनिलीज लोग दक्षिण अंडमान के नार्थ सेंटीननल द्वीप पर निवास करते हैं। ये जारवा लोगों की तरह खूंखार होते हैं। सभ्य समाज के लोगों को देखकर ये कई बार तीर कमान तान देते हैं। भारत सरकार ने उनके सुरक्षित क्षेत्र को संरक्षित रखा है। उनके साथ मित्रतापूर्ण संपर्क करने की कोशिश की जा रही है। पर इसमें ज्यादा सफलता नहीं मिली है। इनकी कुल संख्या 40 के करीब रह गई है।

खुली हवा में रहना चाहते हैं ओंगी – ओंगी लोग पोर्ट ब्लेयर से 130 किलोमीटर दूर लिटल अंदमान में रहते हैं। नाटे और गठीले शरीर वाले ओंगी लोग खाने की चीजों को कच्चा या भूनकर खाते हैं। खाने के लिए ये लोग जंगलों में शिकार करते हैं। पुरुष मात्र कौपीन धारण करते हैं तो महिलाएं अपने छातियों को सूखे पत्तों से ढककर रखती हैं। ये खुली हवा में रहना पसंद करते हैं। शादी मे युवक युवती एक दूसरे शरीर पर मिट्टी का लेप लगाते हैं बस हो गई शादी। कोई जलसा नहीं। इनके यहां एक विवाह की प्रथा कायम है। ओंगी लोगों की आबादी 100 से भी कम रह गई है। ओंगी लोग पेड़ों को काटकर नावों का निर्माण करते हैं।

ग्रेट अंडमानी – ये एक लुप्त होती जनजाति है जो पोर्ट ब्लेयर से 46 किलोमीटर दूर स्ट्रेट द्वीप पर रहती है। ये लोग अब बहुत कम संख्या में बचे हैं। कभी ये फलती फूलती जनजाति थी लेकिन सभ्य समाज से मेल मिलाप के बाद इनकी मृत्यु दर में इजाफा हुआ है। ये अब अंदमान के कमजोर जानजाति के तौर पर आंके जाते हैं।

निकोबारी जनजाति – दक्षिण अंदमान में निकोबारी जनजाति के लोगों को निवास है। उनकी आबादी 20 हजार से ज्यादा है। ये लोग मुख्य धारा में शामिल हो चुके हैं। कई लोग पढ़ लिखकर ऊंचे पदों पर जा चुके हैं। ये देखने में मंगोलियन लोगों से मिलते जुलते होते हैं।  
झारखंड के आदिवासियों ने बसाई रांची बस्ती - अंदमान में स्थानीय लोगों के अलावा केरल से आए मोपला लोगों का भी निवास है। भातू बस्ती में ज्यादातर यूपी से लाए गए लोग रहते हैं। कुछ बर्मीज मूल के लोगों का भी निवास है, ये लोग करेन कहलाते हैं। केरेन मायबंदर इलाके में बसे हैं। इन्हें अंग्रेज बर्मा से बीहड़ जंगलों की कटाई के लिए लेकर आए थे। पोर्ट ब्लेयर में एक रांची बस्ती भी है। यहां झारखंड से आदिवासियों को काम करने के लिए लाया गया था। इसके अलावा द्वीप पर बड़ी संख्या में बंगाली लोग भी हैं। भूतपूर्व सैनिकों के तमिल और तेलगू परिवार भी यहां रहते हैं।
( जानकारियां और चित्र समुद्रिका संग्रहलाय पोर्ट ब्लेयर के सौजन्य से )
( ANDAMAN  NICOBAR, PORT BLAIR, TRIBE, SHOMPEN, ONGE, SENTINELESE )  


Saturday, August 27, 2016

पांच–छह दिन में कुछ ऐसे घूमें अंदमान ((21))

आप अंदमान निकोबार की सैर पर हैं और अगर आपके पास छह दिन हैं तो अंदमान घूमने का कार्यक्रम कुछ इस तरह बना सकते हैं। हालांकि अंदमान के लिए पांच छह दिन कम है। पर समय का सदुपयोग करते ही काफी स्थलों का भ्रमण किया जा सकता है।  
पहला दिन – अगर आप विमान से पोर्ट ब्लेयर पहुंचे हैं तो अक्सर आप दोपहर तक पहुंचेगें तो आपके पास आधे दिन का समय होगा। ऐसे में आप आधे दिन में ऐतिहासिक सेल्युलर जेल जा सकते हैं। यहां तीन बजे से पहले प्रवेश होता है। फिर शाम को यहीं 6.30 बजे से लाइट एंड साउंड शो भी जरूर देखें।

दूसरा दिन – हैवलॉक द्वीप, हैवलॉक के लिए क्रूज का टिकट आने और जाने का अग्रिम में लेना पड़ता है। कई बार यह कई महीने पहले भी बुक कराना पड़ता है। इसके लिए आप खुद या किसी एजेंट की मदद ले सकते हैं।


तीसरा दिन – बाराटांग और रंगत ( एक दिन में वापसी का पैकेज अंडमान टूरिज्म के आफिस से खरीद सकते हैं। चार लोगों के समूह में इसका किराया 6750 रुपये है। वहीं दो लोगों का 5700 रुपये है। अगर ज्यादा समय हो तो एक रात दो दिन का पैकेज या इससे ज्यादा का भी पैकेज अपनी समय की उपलब्धता के हिसाब से ले सकते हैं।

पोर्ट ब्लेयर से बाराटांग की दूरी 150 किलोमीटर है। बाराटांग में मुख्य आकर्षण लाइम स्टोन गुफाएं हैं। बाराटांग में रहने के लिए होटल उपलब्ध हैं।
लाइमस्टोन केव के लिए टिकट 600 रुपये। वन विभाग से परमिट भी लेना पड़ता है। इसके लिए पहचान पत्र जरूरी है। यहां भीड़भाड़ वाले सीजन में लंबी लाइन भी रहती है। गुफा तक जाने के लिए दो किलोमीटर की पैदल ट्रैकिंग करनी पड़ती है।
रंगत – बाराटांग से रंगत 70 किलोमीटर है। रंगत में सुंदर झरने और सुरम्य समुद्र तट है। यहां भी ठहरने के लिए कुछ होटल और गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं।

चौथा दिन – महात्मा गांधी मरीन कांप्लेक्स, वंडूर, जॉलीबाय या रेडस्किन द्वीप, चिड़िया टापू। जॉलीबाय के लिए परमिट जरूरी है। एक दिन पहले यह परमिट और टिकट अंदमान पर्यटन के दफ्तर से प्राप्त कर लें।

पांचवा दिन – नार्थ बे, रॉस, जल जीवशाला, राजीव गांधी वाटर स्पोर्टस कांप्लेक्स देखें। यह सब कुछ देखकर 4 बजे शाम तक लौटने के बाद कारबाइन कोव जा सकते हैं। याद रहे रॉस हर बुधवार को बंद रहता है।

छठा दिन – चाथम शॉ मिल ( एशिया की सबसे बड़ी और सबसे पुरानी लकड़ी चिराई की मिल है) माउंट हेरियेट, समुद्रिका म्युजियम, हैडो, एंथ्रोपोलिकल म्युजियम आदि देख सकते हैं। अपने छह दिन के कार्यक्रम में आप अपना कार्यक्रम टिकट की उपलब्धता के हिसाब से थोड़ा इधर उधर भी कर सकते हैं।  

खरीददारी – अबरडीन बाजार से सब कुछ खरीद सकते हैं। याददारी वस्तुएं भीं। सेल्युलर जेल में विक्री काउंटर से टी शर्ट आदि ले सकते हैं। नार्थ बे से काली मिर्च, गोल मिर्च खरीद सकते हैं।

पोर्ट ब्लेयर में शाकाहारी भोजन -  अन्नपूर्णा कैफेटेरिया ( विशुद्ध शाकाहारी भोजन के लिए। होटल काटाबोमान,अबरडीन बाजार में, पुलिस गुरुद्वारा के पास ( दक्षिण भारतीय भोजन के लिए) , गगन रेस्टोरेंट, अबरडीन बाजार चौराहा पर। इसके अलावा भी कुछ दुकानें हैं जहां शाकाहारी भोजन मिल जाता है। स्ट्रीट फूट काभी आनंद ले सकते हैं। राजीव गांधी वाटर स्पोर्टस कांप्लेक्स के समने शाम को चौपाटी पर पहुंच जाएं।

कहां ठहरें – सबसे सस्ता होटल अबरडीन बाजार में संपत लॉज है। होटल ब्लेयर, शाह एन शाह, राजा मानसून अबरडीन बाजार इलाके में मध्यम दरों वाले हैं। धनलक्ष्मी होटल भी मध्यम दर्जे का है। जे होटल लग्जरी दर्जे का है। जंगली घाट, गोलघर इलाके के होटलों में भी ठहर सकते हैं। जंगली घाट एयरपोर्ट के सबसे निकट का इलाका है। 

परिवहन – अंदमान में लोकल बसें (सिटी बसें) परिवहन का सबसे सस्ता साधन है। एक द्वीप से दूसरे द्वीप के लिए फेरी (छोटा जहाज) सेवा उपलब्ध है। आटो रिक्शा भी चलते हैं। अगर ज्यादा पैसा खर्च करना हो तो टैक्सी भी बुक भी कर सकते हैं।

विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com  

Friday, August 26, 2016

सालों भर सैलानियों की जमघट रहती है अंदमान में... ((20))

अंदमान में पोर्ट ब्लेयर का मुख्य डाकघर 
वैसे तो अंदमान सदाबहार पर्यटक स्थल है। यहां सालों भर देशी विदेशी सैलानियों की जमघट रहती है। पर कब आने की बात की जाए तो लोग सबसे बेहतरीन महीना जनवरी का मानते हैं। जो लोग समुद्री मार्ग से आना चाहते हैं, उस समय यानी जनवरी में सी सीकनेस की संभावना सबसे कम रहती है। जनवरी में अंदमान की रातें सर्द रहती हैं इसलिए यहां का मौसम चटकीला रहता है। पर सैलानियों की भीड़ के कारण ज्यादातर टूरिस्ट प्लेस में यहां पर पहले से लंबी बुकिंग रहती है। इसलिए आपको पहले से तैयारी करके आना होगा। गर्मी और दशहरे की छुट्टियों में भी अंदमान में सैलानियों की आमद बढ़ जाती है। जब तक पोर्ट ब्लेयर न आए हों तो लगता है कि यहां कम लोग आते होंगे पर हकीकत है कि अंदमान देश का ऐसा राज्य है जहां आने की तमन्ना काफी लोग संजोए रहते हैं।
अंदमान आने वाले 90 फीसदी लोग एलटीसी लेकर यानी सरकारी खर्चे पर होने वाली पारिवारिक यात्रा के तहत आते हैं। आना जाना खर्चीला होने के कारण लोग अपने बजट से आने की योजना कम ही बनाते हैं। अंदमान के लिए बहुत सी एजेंसियां टूर पैकेज बेचती हैं। यहां के होटल वाले भी टूर पैकेज बनाकर बेचते हैं। अंदमान टूरिज्म और शहर में कई और आपरेटर भी कई तरह के टूर पैकेज बेचते हैं।

कई माह पहले बनाएं टूर प्लान -  पर अगर आप अंदमान रियायती दरों पर घूमना चाहते हैं तो अपना टूर प्लान कई महीने या एक साल पहले बना लें। जब हवाई टिकट काफी रियायती दर पर मिल रहा हो तो टिकट खरीद लें। इसके साथ ही होटल भी बुक कर लें। इसके लिए आप गोआईबीबो डाट काम देखते रहें। आप दिल्ली , कोलकाता, चेन्नई जहां से भी रियायती टिकट मिले खरीद सकते हैं। इसके अनुसार अपनी यात्रा की योजना बनाएं।
अगर आप अंदमान आकर अपना घूमने फिरने की योजना खुद बनाएं तो टूर प्लानर के भारी भरकम पैकेज से बच सकते हैं। रहने और खाने पीने के लिहाज से अंदमान की राजधानी पोर्ट ब्लेयर काफी किफायती शहर है। बस यहां पहुंचना महंगा सौदा है। आप यूं समझे की अंदमान की तुलना में आप भारत के किसी शहर खास तौर पर कोलकाता से थाईलैंड सस्ते में घूम कर आ सकते हैं। पर अंदमान का अपना अलग जादू है। इसलिए जीवन में एक बार अंदमान तो जरूर पहुंचिए।

कितने दिन रहे यहां-  ये बड़ा सवाल है। अब अंदमान पहुंचना अपेक्षाकृत तौर पर मंहगा सौदा है। इसलिए यहां आने के लिए कम से कम पांच दिन यहां प्रवास की योजना बनाएं। अंदमान के सारे हिस्से घूमना चाहते हैं तो यहां दस दिन रुकना चाहिए।
अंदमान की राजधानी पोर्ट ब्लेयर में आप सबसे सस्ते में अबरडीन बाजार के संपत लॉज में ठहर सकते हैं। महज 300 रुपये प्रतिदिन से शुरुआत। इसके बाद आप कुछ बजट होटल या फिर दो या तीन सितारा होटलों को ठिकाना बना सकते हैं। अगर आप जंगली घाट के किसी होटल में रुकते हैं तो एयरपोर्ट से टहलते हुए अपने होटल तक पहुंच सकते हैं। बस स्टैंड के पास शाह एंड शाह होटल में भी रुक सकते हैं। मेरी पसंद रही हैडो का ड्रीम पैलेस। इसके प्रोपराइटर सरदार मनदीप सिंह टूर एंड ट्रैवेल एजेंसी भी चलाते हैं।
पूरा अंदमान हिंदी भाषी प्रदेश है। बंगाली, बिहारी, छत्तीसगढ़ी, तमिल और मलयाली सभी मूल के लोग यहां बेहतर हिंदी बोलते हैं। यहां के लोग पूछने पर सही जानकारी देते हैं। किसी सवाल पर बड़े अदब से पेश आते हैं। झूठ, फरेब और ठगी यहां के लोगों के फितरत में नहीं है।  
अंदमान में क्या क्या देखें


पोर्ट ब्लेयर शहर में – सेल्युलर जेल, राजीव गांधी वाटर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स, कार्बन कोव द्वीप, जागर्स पार्क,  अबरडीन बाजार,  जल जीव शाला, एंथ्रोपोलाजिकल म्यूजियम, समुद्रिका मरीन म्यूजियम,  मिनी जू हैडो,चाथम शॉ मिल संग्रहालय।

पोर्ट ब्लेयर के आसपास – बंबू फ्लैट द्वीप, माउंट हेरियेट पर्वत चोटी, काला पत्थर, नार्थ बे, रॉस आइलैंड, चिड़िया टापू, वांडूर, महात्मा गांधी मरीन कांप्लेक्स, रेड स्कीन और जॉली बे द्वीप, वाईपर द्वीप, हैवलॉक द्वीप, नील द्वीप।

पोर्ट ब्लेयर से बाहर - रंगत, माइबंदर, कदमतल्ला, डिगालीपुर में कई तरह के बेहतरीन स्पॉट हैं जहां आप जा सकते हैं।  

- विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com

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Thursday, August 25, 2016

अंदमान का नारियल पानी...ऐसी मिठास और कहां... ((19))

वैसे तो नारियल पानी देश के तमाम राज्यों में मिलता है पर अंदमान के नारियल पानी की बात की कुछ अलग है। ऐसी मिठास कहीं और नहीं। और एक नारियल में 750 मिली लीटर से एक लीटर तक पानी होता है। इतना की पीकर आप अघा जाएं। इतना सब कुछ महज 20 रुपये में। मैं एक हफ्ते के अंदमान प्रवास में रोज नारियल पानी पीता रहा। भला इतना सस्ता नारियल पानी मिल रहा हो तो बोतल बंद पानी पीने की क्या जरूरत। और नारियल पानी पीने के जो फायदे हैं वह कहीं और कहां मिल सकता है। प्रकृति ने अंदमान के नारियल पानी में जो मिठासी बरसाई है वह अन्यत्र दुर्लभ है।
एयरपोर्ट से उतरते ही पहले दिन डेयरी फार्म के पास एक नारियल पानी पीया उसके बाद इसका मुरीद हो गया। कसम से ऐसा स्वाद केरल, कांचीपुरम, रामेश्वरम, मदुरै, कन्याकुमारी या फिर बंगाल में कहीं नहीं मिला था।
हैवलॉक - इस तरह लगते हैं नारियल के नए पौधे। 

तो आइए जान लेते हैं नारियल पानी के कुछ फायदों के बारे में। कहा जाता है कि नारियल के पानी में दूध से ज्यादा पोषक तत्व होते हैं, क्योंकि इसमें कोलेस्ट्रोल और वसा की मात्रा नहीं होती है। नारियल पानी में कई प्रकार के गुण पाए जाते हैं। नारियल पानी (इलानीर) एक प्राकृतिक और पोषण तत्वों से समृद्ध लवण युक्त (आइसोटॉनिक) पेय माना गया है। नारियल पानी इलैक्ट्रोलाइट्स, क्लोराइड्स, पोटेशियम और मैग्निशियम से भरपूर होता है। इसमें सीमित मात्रा में चीनी, सोडियम और प्रोटीन भी होता है।
नारियल पानी पीने के अनेक फायदे   

पाचन तंत्र को ठीक रखता है - नारियल पानी पीने के बाद काफी देर तक भूख भी नहीं लगती। इस तरह से यह वजन काबू में रखने में फायदेमंद होता है।  नारियल पानी नेचुरल मॉश्चराइजर भी है। इसके सेवन से मांस-पेशियों की ऐंठन भी दूर होती है। नारियल पानी पीने से इम्यून सिस्टम अच्छा रहता है। साथ ही इसमें मौजूद साइटोकिनीन बढ़ती उम्र के लक्षणों को आने से रोकता है। शरीर में पानी की कमी हो जाने पर या फिर शरीर की तरलता कम हो जाने पर, डायरिया हो जाने पर, उल्टी होने पर या दस्त होने पर नारियल का पानी पीना फायदेमंद रहता है।

रक्तचाप नियंत्रण में -  हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए भी नारियल के पानी का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें मौजूद विटामिन सी, पोटैशियम और मैग्नीशियम ब्लड-प्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायक होते हैं। साथ ही ये हाइपरटेंशन को भी नियंत्रित करने में सहायक होता है। कोलेस्ट्रॉल और फैट-फ्री होने की वजह से ये दिल के लिए बहुत अच्छा होता है। 

एंटी-ऑक्सीडेंट गुण - इसके साथ ही इसका एंटी-ऑक्सीडेंट गुण भी सर्कुलेशन पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। दिल्ली में डाक्टर डेंगू और टायफायड होने पर नारियल पानी पीने की सलाह देते हैं। यह खून में प्लेटिलेट्स की मात्रा को तेजी से बढ़ाता है। तो जहां मौका मिले जरूर पीएं नारियल पानी।
अंदमान में नारियल तेल बनाने का उद्योग भी है। आप यहां से लौटते समय पैक नारियल तेल खरीद कर घर के लिए ले जा सकते हैं। मैंने भी खरीदा नसीम ब्रांड का नारियल तेल का एक डिब्बा अपने घर के लिए।
-         vidyutp@gmail.com



Tuesday, August 23, 2016

ये रॉस है या फिर रास ((18))

सुंदर रॉस द्वीप पर कदम रखते ही मेरा सामना जापानी बंकर से होता है। द्वीप में प्रवेश का टिकट खरीदता हूं। काउंटर पर टिकट देने वाले नौ सेना के जवान हैं। फुटकर नहीं होने के क्रम में उनसे वार्ता होती है। एमके सिंह झारखंड के रहने वाले हैं। वैसे तो नेवी में रडार पर तैनात रहने वाले फौजी हैं पर अभी रॉस में पदस्थापित हैं। वे मुझसे मिलकर काफी खुश होते हैं। मुझे भी उनका आत्मीयता भरा व्यवहार देखकर खुशी होती है। आगे बढता हूं। नारियल पानी के साथ कुछ खाने पीने की चीजें मिल रही हैं।
आगे बढता हूं। रॉस घूमने के लिए मार्ग दर्शिका बनी हुई इसलिए घूमना आसान है। पहले रॉस का इतिहास बताती पट्टियां लगी हैं। इससे आगे बढ़ने पर पानी गर्म करने के लिए बनाए गए बड़े बड़े बायलर के अवशेष नजर आते हैं। अंगरेजों को यहां के पानी से बीमारियां हो रही थीं इसलिए उन्होंने पानी गर्म करने के लिए बडे बायलर स्थापित करवाए। आगे अधिकारियों के क्लब की टूटी फूटी बिल्डिंग नजर आती है। इसी बीच सड़क पर कई मोर नृत्य करते नजर आते हैं। वे हमारा रास्ता रोक लेते हैं। कभी रास्ते में खरगोश आ जाते हैं तो कभी हिरण। मानो उनके लिए रॉस नहीं बल्कि रास हो।

नारियल के पेड़ों से टपक कर नारियल गिर पड़ते हैं पर इन्हे आप काट कर खाएंगे कैसे। आगे प्रेसबिटिरियन चर्च की पुरानी इमारत नजर आती है। इसके आगे सीढ़ियां उतर कर मैं रॉस के समुद्र तट फेयरर बीच तक पहुंचता हूं। अचानक समंदर का अदभुत सौंदर्य प्रस्फुटित हो उठता है। इस नीरव सुंदरता के बीच सिर्फ मैं हूं और एक युगल दंपति। वह मुझे अपनी विभिन्न मुद्राओं में फोटो खींचने के लिए कहते हैं। मैं भी पूरी उदारता से उनकी ढेर सारी फोटो उतारता हूं। उनके लिए भी ये रॉस नहीं रास ही है।

इस सुंदर समुद्र तट को छोड़ने की इच्छा तो नहीं हो रही है पर हमारा समय होता जा रहा है। आगे बढ़ने पर एक कब्रिस्तान नजर आता है। इसके बगल में एक छोटा सा सुंदर तालाब। इसके बाद हम एक लंबे उद्यान में पहुंच जाते हैं। यहां बाहें फैलाए एक युवती की मूर्ति बनी है। उसका सौंदर्य अप्रतिम है।

रॉस द्वीप 18 अप्रैल 1979 में नौ सेना के हवाले किया गया। सामरिक दृष्टि से रॉस का काफी महत्व है। इसलिए नौ सेना इसे निगरानी स्थल के तौर पर इस्तेमाल करती है। कई साल बाद नौ सेना ने इसे आगंतुकों और सैलानियों के लिए खोला। पर नौ सेना इसका 
खास ख्याल रखती है कि इसके ऐतिहासिक महत्व के साथ कोई छेड़छाड़ न की जाए।

हर शाम लाइट एंड साउंड शो - हर शाम रॉस द्वीप पर भी लाइट एंड साउंड शो होता है सेल्युलर जेल की तरह। यहां रॉस का इतिहास दिखाया जाता है। यह शो थ्री डी में आधुनिक तकनीक से दिखाया जाता है। इसका टिकट एक दिन पहले पोर्ट ब्लेयर के टूरिज्म आफिस से लिया जा सकता है। शो के लिए खास फेरी दर्शकों को शाम को लेकर आती है। रॉस में रात को किसी को भी रुकने की अनुमति नहीं है।


सुनामी में ढाल बनकर खड़ा हुआ रॉस - 
साल 2004 में आए सुनामी में रॉस द्वीप पर भी अपना कहर ढाया। पर रॉस इस बार पोर्ट ब्लेयर शहर के लिए एक ढाल बनकर खड़ा रहा। रॉस के कई हिस्सों में दरारें आ गईं। इससे सुंदर फेयरर समुद्र तट का एक हिस्सा समंदर में समा गया। पर लहरों को अपनी छाती पर झेला रॉस ने और पोर्ट ब्लेयर शहर पर सुनामी का प्रभाव बहुत कम पड़ा। शुक्रिया रॉस।

रॉस पर एक सुंदर कैफेटेरिया भी है। यहां बैठ कर आप समंदर में आते जाते जहाजों का नजारा कर सकते हैं। साथ में चाय कॉफी की चुस्की। पर मेरे पास ज्यादा वक्त नहीं बचा है।जाते हुए मैं नौ सेना के जवान एमके सिंह से एक बार फिर बातें करने लगता हूं। उन्होंने कहा था जाते हुए मिलते जाइएगा। पर यह क्या इसी बीच समय हो जाने पर हमारी फेरी सी क्रूज हमें छोड़कर चली जाती है। मैं देखता रह जाता हूं। पर एमके कहते हैं चिंता मत किजिए। इसके बाद आने वाली किसी फेरी में आपको भिजवा दूंगा। इसके बाद एमवी भद्रकाली आती है, मैं उसमें बैठकर अबरडीन जेट्टी पहुंच जाता हूं। अलविदा रास, रॉस।  
- vidyutp@gmail.com

(ANDAMAN, ROSS ISLAND, INDIAN NAVY , LIGHT AND SOUND SHOW ) 
ब्रिटिश काल में रास द्वीप कुछ इस तरह गुलजार रहता था। 
रॉस  द्वीप का फेयरर समुद्र तट- सुनामी झेलने का बाद भी बचा है सौंदर्य।  
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Sunday, August 21, 2016

मनमोहक रॉस द्वीप का सफर ((17 ))

रॉस द्वीप पोर्ट ब्लेयर से सबसे नजदीक का द्वीप है जहां आप फेरी से जा सकते हैं। वैसे तो यहां स्पीड बोट से भी जाया जा सकता है। छोटा सा रॉस द्वीप कई सारी कहानियां समेटे हुए है। किसी जमाने में यह अंदमान की राजधानी हुआ करता था। अब नौ सेना के अधीन है। रॉस द्वीप पर जाने के लिए किसी परमिट की जरूरत नहीं पड़ती है। आप बुधवार को छोड़कर यहां हर रोज घूमने जा सकते हैं। अबरडीन बाजार या सेल्युलर जेल के पास स्थित राजीव गांधी वाटर स्पोर्टस कांप्लेक्स से सुबह के समय रॉस द्वीप के लिए फेरी सेवाएं चलती हैं। हालांकि अबरडीन जेट्टी से रॉस की दूरी सिर्फ 800 मीटर है और 15 मिनट का रास्ता पर दोपहर 12 बजे के बाद यहां नहीं जा सकते। सुबह कई कंपनियों की बोट जेट्टि यहां से रॉस के लिए रवाना होती हैं। सिर्फ रॉस जाना हो तो आने जाने का किराया 100 रुपये है। लेकिन रॉस के साथ नार्थ बे का पैकेज हो तो किराया 350 रुपये से 550 रुपये तक हो सकता है। आप एजेंट के बजाय सीधे काउंटर से जाकर टिकट लें तो किराया किफायती हो सकता है।

तो चलिए चलते हैं रॉस के सफर पर। मैं एमवी सी क्रूज नामक जहाज फेरी में सवार हूं। इसकी क्षमता 44 लोगों की है। समंदर के हर सफर में लाइफ जैकेट पहनना जरूरी है। हमारे फेरी ने रॉस द्वीप घूमने के लिए कुल एक घंटे 15 मिनट का समय दिया है। रॉस द्वीप पर आपको उतरने पर नेवी के काउंटर से प्रवेश टिकट लेना पड़ता है। 30 रुपये का प्रवेश टिकट और 30 रुपये कैमरे के लिए। यह टिकट एक डिजिटल कार्ड के रूप में होता है जो वापसी में जमा करना पड़ता है।

रॉस के प्रवेश द्वार पर ही जापानी बंकर दिखाई देता है जो अंदमान मे तीन साल जापानी कब्जे की कहानी बयां करता है। रॉस द्वीप का नाम डेनियल रॉस के नाम पर पड़ा। यह अंदमान में ब्रिटिश अधिकारियों का पहला पड़ाव था। पर अब रॉस में सिर्फ खंडहर बचे हैं जिन्हें नौसेना ने खूबसूरती से बचा रखा है। सुंदरता ऐसी है कि हरे भरे नारियल के पेड़ों की कतार के बीच रॉस हिरण, मोर, खरगोश बेफिक्र होकर घूमते नजर आते हैं। आबोहवा अत्यंत सुहानी है। वातावरण में प्रकृति का संगीत अनवरत सुनाई देता है। इस संगीत के साथ समंदर की लहरें सुर में सुर मिलाती प्रतीत होती हैं।

रॉस में आप जापानी बंकर, प्रेसबेटेरियन चर्च, पानी गर्म करने वाला हमाम, स्विमिंग पुल, अधिकारियों का क्लब, कब्रिस्तान, तालाब के अलावा फेयरर बीच देख सकते हैं। द्वीप का कुल क्षेत्रफल 600 वर्ग मीटर है। रॉस को अंदमानी भाषा में चोंग एकी बूड नाम से जाना जाता था। पर जलीय पर्यवेक्षक डेनियल रॉस के नाम पर यह रॉस आईलैंड कहलाने लगा। आर्चीबाल्ड ब्लेयर ने इस द्वीप पर 1789 में कदम रखा था। भौगोलिक स्थित के कारण ब्रिटिश अधिकारियों ने इसे अपना आवास बनाया। इसे पेरिस ऑफ इस्ट कहा गया। यहां गिरिजाघर, आवासीय घर, दुकानें, अस्पताल, स्विमिंग पुल, मिनरल वाटर प्लांट, हमाम, क्लब आदि का निर्माण कराया गया। 

करीब 500 लोगों की आबादी किसी जमाने में रॉस द्वीप पर रहती थी। इसमें ब्रिटिश अधिकारी, फौजी और भारतीय व्यापारी भी शामिल थे। पर 26 जनवरी 1941 को आए एक भीषण भूकंप ने रॉस द्वीप पर काफी नुकसान पहुंचाया। इससे द्वीप में दरारें आईं और कई बड़े भवन ध्वस्त हो गए। 23 मार्च 1942 को जापानी सेना ने रॉस पर हमला बोला। तब ब्रिटिश सेना ने उनके सामने सरेंडर कर दिया। 1945 में एक बार फिर रॉस ब्रिटिश सेना के कब्जे में आ गया। जब 1947 में देश आजाद हुआ और रॉस भी आजाद भारत का हिस्सा बन गया।
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रॉस द्वीप का एक विहंगम नजारा। 

 ( अगली कड़ी में पढिए - राॉस द्वीप का अदभुत सौंदर्य -  ये रॉस है या रास  ) 

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Friday, August 19, 2016

हैवलॉक -समंदर किनारे शानदार कॉटेज में रहने का मजा ((16))

हैवलॉक द्वीप पर राधानगर में सैलानियों के रहने के लिए अंडर ग्राउंड हट भी बने हुए हैं। नारियल के पेड़ों के झुरमुट के बीच नीले समंदर के किनारे इन हट्स में रहने का अपना आनंद है। आप पूरे परिवार के साथ इनमें ठहर सकते हैं। समंदर के किनारे इन हट्स का एक दिन का किराया 2500 रुपये है। अंदमान के टूरिज्म विभाग से इनकी बुकिंग कराई जा सकती है। तो आप यहां रहने का रोमांच प्राप्त कर सकते हैं।

टूरिस्ट इन्फारमेशन सेंटर -  हैवलॉक में सैलानियों की मदद के लिए गोविंदनगर में टूरिस्ट इन्फारमेशन सेंटर भी संचालित है। अगर आप क्रूजसे वापस चल पड़े हैं और भूख लग रही है तो क्रूज की आन बोर्ड केटरिंग की सुविधा का लाभ ले सकते हैं। साथ ही आप अपने क्रूज से यादगारी के तौर पर उनकी टी शर्ट और टोपियां आदि खरीद सकते हैं। हैवलॉक से पोर्ट ब्लेयर वापस आने पर लगता है कि हमें कुछ दिन उसी द्वीप पर गुजार कर आना चाहिए था।


महवा में दोपहर का लंच -गोविंदनगर में उतरने पर  हमारी मुलाकात एक स्थानीय पुलिस वाले सज्जन से हुई। उन्होंने कहा कहा कि आप राधानगर में महवा में ही दोपहर का लंच करें। वहां का खाना अच्छा है। राधानगर में महवा रेस्टोरेंट दरअसल एक लकड़ी की इमारत है। इसमें आधार तल पर किचेन और ऊपर ओपन रेस्टोरेंट है। बैठने की जगह से चारों तरफ जंगल और समंदर का नजारा दिखाई देता है। 

आप अगर ज्यादा लोगों के समूह में हैं तो वहां पहले ही जाकर खाने का आर्डर कर दें वर्ना खाना खत्म हो सकता है। आम तौर पर ये रेस्टोरेंट 12 बजे से 2 बजे के बीच खाना परोसता है। यह शुद्ध शाकाहारी रेस्टोरेंट है। कुल 150 रुपये का कूपन लेकर ऊपर जाइए। बफेट सजा है। किसी भोज की तरह। आप खुद से खाना लिजिए और जी भर कर खाइए। तवे  की रोटी, चावल, दाल, दो सब्जियां, पापड़, अचार आदि। रोटी मिलेगी सिर्फ तीन बाकी सब कुछ चाहे जितनी मर्जी खाएं।

महवा रेस्टोरेंट का खाना सुस्वादु था। रेस्टोरेंट वाले ने बताया कि अभी कम सैलानी आ रहे हैं इसलिए हम रोज 25-30 लोगों का ही खाना बनाते हैं। इसलिए देर से आने वालों के लिए खाना खत्म हो जाता है। खाकर आराम करने की इच्छा हुई। समय भी था तो समंदर के किनारे पेड़ों की छांव में लकड़ी की बनी बेंच पर जाकर लेट गया। ठंडी ठंडी हवाएं चल रही थीं। पर सोना नहीं था, कहीं वापसी की बस न छूट जाए।

वैसे हैवलॉक के राधानगर में महवा के अलावा खाने पीने के कुछ और रेस्टोरेंट भी हैं। यहां खाने की दरें महवा से कम हैं। आप चाहें तो फ्रूट सलाद और दूसरे फलों का स्वाद भी ले सकते हैं। यहां मिलने वाली ज्यादातर फल और सब्जियां इसी द्वीप की उपज होती हैं। अगर आप राधानगर में कुछ पेट पूजा नहीं भी कर सके तो कोई बात नहीं, गोविंदनगर बंदरगाह के पास बाजार में भी कई रेस्टोरेंट मौजूद हैं। यहां आप शाकाहारी के अलावा सी फूड का भी आनंद ले सकते हैं। नारियल पानी तो हर जगह मिलता है।
वाटर गेम्स का मजा - हैवलॉक द्वीप पर समंदर में कई तरह के वाटर गेम्स का मजा भी लिया जा सकता है जैसे स्कूबा डाइविंग, सी वाकिंग, स्नोरकेलिंग आदि। सी वाकिंग के 45 मिनट के अभ्यास के लिए दो हजार रुपये शुल्क है। समंदर में पानी के अंदर जाने का आनंद लेने वाले लोग इसका आनंद लेना चाहते हैं। यह एक यादगार अनुभव होता है।
हमारे साथ एक सज्जन हैं केरल के दुबई में नौकरी करते हैं पर उनकी पत्नी पोर्ट ब्लेयर की हैं जो अपने पति को पोर्टब्लेयर के द्वीप घूमाने लाई हैं। वे मुझे हैवलॉक की कुछ विशेषताओं से अवगत कराती हैं।
हैवलॉक से हमारी वापसी की क्रूज 3.45 बजे है। मैं आधे घंटे पहले ही गोविंद नगर जेट्टी पहुंच गया हूं। वापसी में भी चेकइन काउंटर पर जाकर टिकट की जांच करवाने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, उसके बाद जेट्टि एरिया में प्रवेश मिला। वापसी में बोट पर सीटें खाली हैं इसलिए मैं पूरे रास्ते अलग अलग जगहों पर बैठकर यात्रा का आनंद ले रहा हूं। 


हमारे साथ हैदराबाद का एक मुस्लिम व्यापारी परिवार सफर कर रहा है। उनके साथ कई नन्हें बच्चे भी हैं। इस परिवार के एक युवा कारोबारी यहां भी फोन पर कारोबार की बातें अपने किसी क्लाएंट से किए जा रहे हैं। वे अपने हर जवाब के साथ जोड़ते हैं इंसा अल्ला। मैं अभी अंदमान में हूं...इंसा अल्ला। मैं हैदराबाद आकर आर्डर भेजूंगा...इंसा अल्ला। आपका आर्डर मिल गया...इंसा अल्ला। पूरी बातचीत में उन्होंने 36 बार इंसा अल्ला जोड़ा।  वापसी में समंदर की लहरों में उछाल तेज है। क्रूज का पिछला हिस्सा हिल रहा है। पर स्टाफ बताता है कि यह रोज होता है घबराने की कोई बात नहीं। फिनिक्स बे पर उतरने के बाद मैं सारे स्टाफ को धन्यवाद कहकर हैवलॉक की मीठी यादें लिए आगे बढ़ जाता हूं।  

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Wednesday, August 17, 2016

राधानगर में विहार करती गोपियां और कन्हैया ((15 ))

अंदमान के सबसे सुंदर द्वीपों में से एक है हैवलॉक द्वीप। अंदमान आने वाले ज्यादातर सैलानी यहां जरूर जाते हैं। प्रकृति ने हैवलॉक को जी भरकर खूबसूरती सौंपी है। इसलिए आप भी पोर्ट ब्लेयर पहुंचने पर हैवलॉक जरूर जाएं। हैवलॉक का सबसे सुंदर समुद्र तट है राधानगर।
मन मोह लेता नीला समुद्र। समुद्र के किनारे अनमने जंगल। क्या दोपहर हो या क्या शाम राधा नगर का सौंदर्य हमेशा मन मोहता है। राधा नगर को देश के सबसे सुंदर समुद्र तट में शुमार किया जाता है। साल 2004 में टाईम मैगजीन ने इसे एशिया का सबसे सुंदर समुद्र तट बताया। राधानगर को देखकर कुछ कुछ त्रिवेंद्रम के पास कोवलम बीच की याद आती है। समंदर के किनारे रेत पर मौज मस्ती करते बच्चे बूढ़े जवानों से राधानगर गुलजार रहता है। नव विवाहित युगल तो यहां आते ही समंदर में अटखेलियां शुरू कर देते हैं। राधानगर का पानी इतना साफ है कि वह आपको नहाने के लिए आमंत्रित करता है। यहां चाहे आप कितनी देर तक भी नहाते रहें जी नहीं भरता। राधानगर के तट पर पहुंचते ही मानो रह बाला राधा और गोपियों का रूप धर लेती है तो हर युवा कान्हा बन जाना चाहता है। यह एक सभ्य, शालीन और पारिवारिक द्वीप है।


दुनिया की भीड़ से दूर। वाहनों के चिल्लपों से दूर। एक नन्हें से द्वीप पर समुद्र की तट पर अप्रतिम सौंदर्य में खो जाने का मौका देता है राधानगर। जब समंदर में नहाते हुए थक जाएं तो वाच टावर पर चढ़कर लहरों का नजारा करें। नजारा करने के लिए यहां कई हट्स और लकड़ी की बेंच भी बनी हुई हैं। इतना सब कुछ से जी नहीं भरे तो समंदर के किनारे किनारे जंगलों की सैर पर निकल जाएं।
सुरक्षा के लिए अंदमान टूरिज्म के गोताखोर राधानगर के किनारे तैनात रहते हैं। पर सैलानियों को चाहिए कि उन्हें तैरना आता हो या नहीं वे गहरे समुंदर में न जाएं। राधानगर आप पहुंच गए हैं और समंदर में नहाने के लिए कपड़े लेकर नहीं आए हैं तो यहां छोटी छोटी दुकाने हैं जहां से आप टी शर्ट निक्कर टावल आदि खरीद सकते हैं। पर नहाने का मौका न गंवाएं। यहां पर लोगों की सुविधा के लिए टायलेट, कपड़े बदलने के लिए कमरे और सामान रखने के लिए लॉकर आदि की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। राधानगर ऐसी जगह है जहां आप तीन घंटे आराम से गुजार सकते हैं। अगर आप हैवलॉक में ही रूके हैं तो कई बार यहां पहुंच सकते हैं।

हमने सरकारी बस सेवा का समय पता कर लिया था। वापसी की बस दो बज कर 15मिनट पर थी। उसके बाद वाली बस 3 बजे थी पर उससे क्रूज छूट जाने का खतरा था। इसलिए मैं नीयत समय पर आकर बस में बैठ गया। बस फिर उसी हरे भरे रास्ते पर लौट पड़ी।
वापसी में एक बार फिर काउंटर पर टिकट चेक इन कराना पड़ता है। समय होने पर क्रूज में प्रवेश आरंभ हुआ। वापसी में हमारा जहाज तेज हिचकोले खा रहा था।जहाज के स्टाफ ने बताया कि हम अब लहरों के विरूद्ध चल रहे हैं इसलिए जहाज हिचकोले खाता है। कई बार तो हिचकोले काफी तेज हो जाते हैं। मैक्रूज के स्टाफ ने बताया कि सितंबर 2016 से हमारे जहाजों का किराया और बढ़ने वाला है। पर हैवलॉक का ये सफर तो है काफी यादगार।
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Tuesday, August 16, 2016

सपनों सा सुंदर हैवलॉक द्वीप ((14 ))

हैवलॉक द्वीप एक सपीनीली दुनिया जैसी है। जहाज से उतरकर हैवलॉक की धरती पर कदम रखते हुए कुछ अच्छा सा एहसास होने लगता है। हमारी फेरी गोविंद नगर में आकर लगी है। हैवलॉक में सभी जहाज यहीं पर आते हैं। वैसे पोर्ट ब्लेयर से हैवलॉक तक की 57 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए हेलीकॉप्टर की भी सेवा है। गोविंदनगर में ही थोड़ी दूरी पर हेलीपैड बना हुआ है। गोविंद नगर के छोटे से बंदरगाह पर ही मैक्रूज, ग्रीन ओसन और सरकारी फेरी सेवाएं आकर लगती हैं। इस नन्हे से बंदरगाह के बाहर छोटा सा बाजार है। मैं यहां पर एक पंजजलि का मारी लाइट बिस्कुट खरीदता हूं। जो लोग पहले से हैवलॉक में होटल बुक करके आए हैं। उनके होटल वाले गाड़ी के साथ स्वागत के लिए मौजूद हैं।

पर हैवलॉक द्वीप का सबसे बड़ा आकर्षण राधानगर बीच है। वहां जाने के लिए बसें भी चलती हैं। बस 10.30 में खुलेगी। मेरे पास थोड़ा समय है। मैं आसपास के बाजार में घूमता हूं। महिलाएं केले, अनानास और आम बेच रही हैं। टीशर्ट, निक्कर और उपहार में दिए जाने योग्य वस्तुओं की दुकाने सजी हैं। साढ़े 10 बजे हमारी बस चल पड़ती है गोविंदनगर से राधानगर के लिए। सड़क सुंदर है, दोनों तरफ पक्के फुटपाथ भी बने हैं। रास्ते में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा नजर आती है। यहां एटीएम भी है। चौराहे पर एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। बस में ज्यादातर स्थानीय लोग हैं। गोविंद नगर से राधानगर का किराया है 10 रुपये। रास्ते के दोनों तरफ हरे भरे खेत और नारियल के पेड़ नजर आते हैं। एक पंचायत भवन दिखाया देता है। इस पर ग्राम प्रधान के दफ्तर का बोर्ड लगा है। नीचे बड़ा हॉल बना है। संभवतः यह बारिश से बचने के लिए आसरे के तौर पर बनाया गया है। ऊपरी मंजिल पर दफ्तर है। पूरे अंदमान में इसी तरह के ग्राम प्रधान के दफ्तर बने हैं।

हैवलॉक द्वीप पर सभी क्षेत्रों के नाम कान्हा जी पर आधारित हैं। गोविंद नगर, राधा नगर, कृष्णा नगर श्याम नगर। इस द्वीप पर राधानगर के अलावा एलीफैंट बीच, कालापत्थर बीच और डॉलफिन रिजार्ट प्रसिद्ध स्पॉट हैं।

किराये की बाइक पर करें सैर- हैवलॉक द्वीप पर सार्वजनिक  बस सेवा के अलावा आटो रिक्शा, निजी टैक्सियां चलती हैं। यहां अगर आप रुकते हैं बाइक किराये पर लेकर द्वीप की सैर भी कर सकते हैं। आप जिस होटल या रिसार्ट में ठहरते हैं उनकी मदद से बाइक किराये पर लेकर द्वीप के सौंदर्य का दर्शन कर सकते हैं।

हरा भरा द्वीप -  हैवलॉक और नील अंदमान के हरे भरे द्वीपों में गिने जाते हैं। यहां नारियल के पेड़ के अलावा केले बहुतायत हैं। सब्जियों की खेती खूब होती है। हैवलॉक का विस्तार 114 वर्ग किलोमीटर में है। यहां गांवों में तकरीबन 6000 की आबादी रहती है। इसका नाम ब्रिटिश अधिकारी हेनरी हैवलॉक के नाम पर पड़ा था। द्वीप पर रहने वाले लोगों में बंगाली विस्थापित लोग हैं। काफी लोग ऐसे हैं जो बांग्लादेश बनने के बाद यहां आए। हैवलॉक आने के लिए किसी परमिट की जरूरत नहीं होती है। अंदमान निकोबार का टूरिज्म विभाग यहां इको टूरिज्म बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। हैवलॉक में रहने के लिए कई होटल और रिजार्ट हैं। काफी सैलानी यहां दो दिन गुजारना पसंद करते हैं।
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आगे पढ़िए - हैवलॉक के राधानगर में विहार करती गोपियां और कन्हैया...

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