Monday, January 15, 2018

मुन्नार में कभी चलती थी मोनो रेल

कानन देवन हिल प्लांटेशन का दफ्तर जो कभी लाइट रेलवे का स्टेशन हुआ करता था। 
मुन्नार प्रसिद्ध है अपने हरे भरे चाय के बगानों के लिए। यहां चाय की खेती सैकड़ो साल से हो रही है। अब मुन्नार में जितने भी चाय के बगान हैं वे टाटा समूह के अधीन आते हैं। पर एक मजेदार और बात ऐतिहासिक तथ्य है कि मुन्नार में देश की पहली मोनो रेल चली थी।

भले ही आज मुन्नार रेल से संपर्क में नहीं है पर किसी जमाने में यहां चाय के परिवहन के लिए रेल चलाई गई थी।  तो चलिए चलते उलटते हैं अतीत  के कुछ पन्ने। मुन्नार में 1902 से 1908 के बीच कुंडाला वैली मोनो रेल का संचालन किया गया। हम मुन्नार भ्रमण के दौरान मुन्नार बाजार से कुंडाला लेक और टॉप स्टेशन तक के नजारे देखने गए। पर इन्ही नजारों के बीच कभी मोनो रेल चलती थी। इसका संचालन कानन देवन चाय कंपनी द्वारा किया जाता था। इसका निर्माण 1902 में मुन्नार से टॉप स्टेशन के बीच किया गया। 

इसे रेलवे को खास तौर पर चाय के परिवहन के लिए संचालित किया जा रहा था। इसके ट्रैक को मुन्नार से टाप स्टेशन को जा रही सड़क पर ही किनारे किनारे बिछाया गया था। मुन्नार में अब उस रेल को देखने वाला कोई नहीं बचा। पर स्थानीय लोगों को मालूम है कि कभी यहां पर रेल चलती थी। यह मोनो रेल भी तकनीक के लिहाज से पटियाला स्टेट मोनो रेल की तरह इविंग सिस्टम पर भी आधारित थी।

क्यों जरूरत पड़ी मोनो रेल की। दरअसल 1902 तक टाटा टी कंपनी देश के प्रसिद्ध चाय उत्पादक कंपनियों में शुमार हो चुकी थी। पूरे देश में उसकी कुल 16 ताय फैक्ट्रियां थीं। मुन्नार मेंचाय के उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा हर साल ब्रिटेन भेजा जाता था। इसके लिए तमिलनाडु के तूतीकोरीन बंदरगाह तक ताय पहुंचाई जाती थी। पर तब चाय के परिवहन के लिए तेज गति वाले साधनों का अभाव था। तब कंपनी के जनरल मैनेजर एम माइम ने एक मोनोरेल  स्थापित करने की योजना बनाई। इसे मुन्नार वाया मुट्टुपेट्टी होते हुए टॉप स्टेशन तक चलाया गया। 
मुन्नार में एलुमिनियम ब्रिज - कभी इस पुल से होकर गुजरती थी लाइट रेल 

बैल खींचते थे मोनो रेल
इस मोनो रेल को संचालित करने के लिए 500 बैल बहाल किए गए। इन बैलों की देखभाल के लिए एक वेटनरी डाक्टर और दो सहायक भी इंग्लैंड से बुलाए गए। मतलब साफ है कि इस मोनो रेल को कोई लोकोमोटिव नहीं खींचता था।  इस मोनो रेल का एक छोटा पहिया लोहे की पटरी पर चलता था तो दूसरा बड़े आकार का पहिया सड़क पर।  टॉप स्टेशन से चाय को रोपवे से कोटागुड्डी तक पहले लाया जाता था। इसे बाटम स्टेशन भी कहा जाता था। बॉटम स्टेशन से चाय को मोनो रेल से मुन्नार लाया जाता था। फिर यहां से चाय पैक होकर तूतीकोरीन बंदरगाह तक जाती थी। चाय की पैकिंग के लिए जो कंटेनर इस्तेमाल किए जाते थे वे इंपेरियल चेस्ट कहलाते थे जो ब्रिटेन से लाए जाते थे।

1908 में मोनो रेल की जगह लाइट रेल
पर 1908 में मोनो रेल को लाइट रेलवे में बदल दिया गया। इसका उद्देश्य था चाय की ज्यादा तेज गति से ढुलाई। मोनो रेल की जगह मुन्नार बाजार से टाप स्टेशन तक 32 किलोमीटर के मार्ग में 2 फीट यानी 610 एमएम की पटरियां बिछाई गईं। रेलवे के संचालन के लिए स्टीम लोकोमोटिव मंगाए गए। तब रास्ते में इसके दो स्टेशन बनाए गए। पालार और मुट्टुपेडी में इसका स्टेशन हुआ करता था। फिलहाल मुन्नार बाजार में काननदेवन हिल टी प्लांटेशन का जो क्षेत्रीय कार्यालय है, वह कभी लाइट रेलवे का स्टेशन हुआ करता था। इसके साथ ही मुख्य दफ्तर भी यहीं था। चाय को उतारने के लिए जो प्लेटफार्म का इस्तेमाल किया जाता था वहां पर अब सड़क बन गई है। इसके बगल में छोटी बह रही नदी पर एक एलुमिनियम का पुल आज भी दिखाई देता है। इस पुल से होकर ही कभी लाइट रेलवे गुजरती थी। पर अब उस पुल के ऊपर सड़क बना दी गई है। हालांकि वह पुल अभी भी बेहतर हालत में है।  

और बाढ़ में सब कुछ बर्बाद हो गया

1924 में यह लाइट रेलवे भी बंद हो गई। कैसे बंद हुई इसकी दास्तां दुखद है। दरअसल 1924 में मुन्नार इलाके में बाढ़ के रुप में प्रकृति का कहर बरपा। इस बाढ़ ने मुन्नार से टाप स्टेशन तक कुंडाला वैली रेलवे के ट्रैक और रोलिंग स्टाक को बरबाद कर दिया। बरबादी इतनी भीषण थी, बाढ़ का असर खत्म होने के बाद इस रेलवे लाइन को फिर से नहीं बनाया जा सका। जुलाई 1924 में आए इस बाढ़ को केरल में ग्रेट फ्लड आफ 99 कहते हैं। मलयालम कैलेंडर में यह 1099 का साल था। खास तौर पर पेरियार नदी ने काफी कहर ढाया था। एर्नाकुलम, इडुकी, कोट्टायम, त्रिशूर, अलपुजा आदि जिलों में बाढ़ से काफी बरबादी हुई थी।  

इस तरह कुंडाला वैली लाइट रेलवे इतिहास के पन्नों में समा गई। अब मुन्नार में मोनो रेल या लाइट रेलवे की स्मृति में कुछ दिखाई नहीं देता। दिखती है तो बस चाय की बगानें। 
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
( KUNDALA VALLY MONO RAIL, MUNNAR, TATA TEA ) 

 
पालार में कभी लाइट रेलवे का स्टेशन हुआ करता था। 



Sunday, January 14, 2018

मुन्नार - जम कर खाइए और घूम-घूम कर पचाइए

अगर आप शाकाहारी हैं तो मुन्नार में आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। मुन्नार में आपको हर तरह की शाकाहारी भोजन की थाली मिल जाएगी। यहां तक कि उत्तर भारतीय मारवाड़ी और जैन थाली भी मिल जाएगी। बस थोड़ी अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी।
वैसे मुन्नार के सबसे लोकप्रिय फूड जंक्शन की बात करें तो वह है सरवन भवन। हालांकि ये सरवन भवन चेन्नई वाले सरवन भवन की शाखा नहीं है। पर यह मुन्नार का सबसे ज्यादा चलता हुआ और वाजिब दरों पर खाना परोसने वाला रेस्टोरेंट है। यह सुबह से शाम तक लगातार खाना परोसता है। केले के पत्ते पर डोसा, इडली, उत्तम के अलावा बिरयानी और कई तरह के व्यंजन। अनादि यहां पर कई बार चाउमीन खाते रहे। पर सबसे सस्ता है यहां पर पराठा खाना। पर ये पराठा दक्षिण भारतीय होता है।
मतलब मैदे का पराठा और साथ में चूरमा। यानी रसेदार सब्जी। पर आप मुन्नार में इससे भी सस्ता पराठा खा सकते हैं। मुख्य बाजार में स्ट्रीट फूड वाले स्टाल पर। यहां स्थानीय खाने वालों की भीड़ खूब उमड़ती है। बाकी मुन्नार में मांसाहारी भोजनालय खूब हैं।

पर हम कुछ और शाकाहारी पेटपूजा वाले स्थलों की बात करेंगे। मुख्य बाजार में बस स्टैंड के पास एक बेकरी है जहां पर आप पेस्ट्री, समेत कई तरह के नमकीन का स्वाद ले सकते हैं। राजस्थानी स्वाद वाले शाकाहारी भोजन के लिए पुरोहित भोजनालय पहुंचिए। यहां सुबह नास्ते में पराठा भी मिल जाएगा। थाली थोड़ी महंगी है। पर दक्षिण भारत के हिल स्टेशन में पहुंच कर उत्तर भारतीय खाने की तलाश करेंगे तो थोड़ी जेब तो ढीली करनी पडेगी।

दरअसल यहां उत्तर भारतीय रसोईया को लाकर काम लेना महंगा पड़ता है। पंजाबी थाली, राजस्थानी थाली, गुजराती थाली, बांबे थाली आदि सब मिल जाएगा। 190 रुपये से 300 रुपये के रेंज में जाकर। एक और विकल्प है श्री महावीर भोजनालय का।  हमलोगों ने कई बार महावीर भोजनालय का रुख किया। यह मुन्नार का एक औ चलता हुआ रेस्टोरेंट है। इससे थोड़ा आगे बढ़े तो संगीता रेस्टोरेंट भी शाकाहारी विकल्प के तौर पर आपका स्वागत करता है।

पर मुन्नार में रोज सुबह के नास्ते में मेरी पसंद बना रहा है पुट्टु.दक्षिण भारतीय चावल का बना यह डिश गरम खाने में काफी अच्छा लगता है। अनाई रेस्टोरेंट में हम रोज यही खाते रहे। माधवी मसाला डोसा पसंद करती हैं तो अनादि को अब दक्षिण के बड़ा खूब पसंद आने लगा है। पहले वह मैसूर भाजी पसंद करते थे।तो खाने पीने की बहुत बात हो गई चलिए अब घूमने चलते हैं।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य  ( SARAVANA BHAWAN, MUNNAR, PUROHIT VEG, MAHAVEER BHOJNALYA ) 

Saturday, January 13, 2018

केरल – द स्पाइस कोस्ट ऑफ इंडिया

जब आप मुन्नार में रहकर आसपास घूमने निकलते हैं तो टैक्सी और आटोरिक्शा वाले स्पाइस गार्डन जरूर लेकर जाते हैं। मुन्नार कोचीन मार्ग पर ऐसे कई स्पाइस गार्डन बने हैं। ये निजी गार्डन किसी म्युजियम जैसे हैं। यहां पर आप मसालों की दर्जनों किस्मों के पेड़ और औषधीय पौधे भी देख सकते हैं। इनके सेल्स आउटलेट यानी बिक्री केंद्र से खरीदारी भी कर सकते हैं। हमलोग भी एक ऐसे ही स्पाइस गार्डन में पहुंच हैं। यहा 100 रुपये का प्रवेश टिकट है। साथ में एक गाइड मिलती है मुबीना मसालों के बारे में हिंदी में वे रोचक ढंग से जानकारी देती हैं। इस उद्यान में एक मिनी जू भी बना है। इसमें परंपरागत चूल्हे भी देखे जा सकते हैं। 


आपके खाने की थाली भला बिना मसालों को हो सकती है क्या। भारतीय खाने का स्वाद मसालों के बिना अधूरा है। पर ये मसाले सिर्फ स्वाद नहीं सेहत के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। और इन मसालों की खेती के लिए हजारों साल से मशहूर का दक्षिण का राज्य केरल।

केरल के मसालों का जादू तीसरी शताब्दी ईस्वी पूर्व से पूरी दुनिया में बोल रहा है। कहा जाता है वास्कोडिगामा को इन मसालों की खुशबू ही यहां तक खींच लाई। रोम ने केरल के मसालों को खरीदने के लिए अपने खजाने की बोरी खोल दी थी। वहीं चीन अपने सिल्क के वस्त्रों के बदले यहां के मसालों की तिजारत करते थे। आजकल भी केरल तकरीबन 12 तरह के मसालों के साथ दुनिया भर में राज करता है। आज केरल मसालों का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है।

तो फोर्ट कोच्चि के गलियों में घूमते हुए आप किस्म किस्म के मसालों की सजी हुई दुकानें भी देख सकते हैं और खरीद भी सकते हैं। इतिहास में केरल की प्रसिद्धी दुनिया में दूर दूर तक इसके सुगंधित मसालों के कारण फैली थी। केरल के मसाले सुगंध देने के साथ साथ सेहत के लिए भी काफी लाभकारी होते हैं।


काली मिर्च (BLACK PEPPER ) तमाम मसालों के बीच काली मिर्च का अपना महत्व है। केरल में काली मिर्च की खेती मिश्रित फसल पद्धति के तौर पर की जाती है। केरल के वयनाड जिले में काली मिर्च के पौधे कॉफी के पौधे के साथ लगाए जाते हैं। इस तरह एक साथ दो फसल वहां उगाई जाती है। वहां इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। हांलाकि काली मिर्च की खेती कर्नाटक, तमिलनाडु और अंडमान निकोबार में भी की जाती है। काली मिर्च पाचन क्रिया में काफी लाभकारी है। काली मिर्च, नमक, जीरा और आजवाइन के साथ भून कर लेने पर पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है। काली मिर्च वजन को कम करने में भी सहायक है।

छोटी इलायची (CARDAMOM )- अपने अनोखे सुगंध और स्वाद के कारण इसे 'मसालों की रानी' कहा जाता है। इलायची एक बारहमासी, शाकीय, प्रकन्दीय मूल का पौधा है। पश्चिमी घाट का मौसम इलायची की खेती के लिए अनुकूल है। केरल और और कर्नाटक में बड़े पैमाने पर इलायची की खेती होती है। इलायची का सेवन आमतौर पर लोग सांस और मुंह को साफ रखने के लिए करते हैं। पर यह वाजीकरण के नुस्खे के तौर पर भी काम करता है। यह सेक्स पावर बढ़ाने और इंसान को हमेशा युवा बनाए रखने में भी काफी कारगर है।

दालचीनी (CINNAMON)  – दालचीनी एक छोटा पर सदाबहार पेड़ है। मसाले में दालचीनी के पेड़ की छाल का इस्तेमाल होता है। यह 10–15 मीटर तक ऊंचा होता है। इसकी खेती श्रीलंका में अति प्राचीन काल से की जाती थी। केरल में भी दालचीनी की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। दालचीनी को वंडर स्पाइस भी कहते हैं। यह खाने का जायका बढ़ाने के साथ गठिया का दर्द दूर करने में लाभकारी है। दालचीनी पाउडर को शहद के साथ लेने पर दर्द में आराम मिलता है। एक चम्मच शहद और आधा चम्मच दालचीनी का पाउडर को मामूली गरम पानी के साथ नियमित तौर पर लेने से गठिया में आराम पड़ता है। दालचीनी पाउडर का पानी में पेस्ट बनाकर जोड़ो पर मालिश भी करने से गठिया दूर होता है।

लौंग – (CLOVE) -  अब बात लौंग की। केरल का एक सामान्य मसाला माना जाने वाला लौंग वास्तव में यूजीनिया कैरिओफिलीटा नामक वनस्पति की सूखी हुई कली होती है। केरल के लोग इसे ग्रम्बु या करयम्बु कहते हैं। लौंग गरम मसाला का प्रमुख सदस्य है। इसे गरम मसाला में विभिन्न अनुपातों में भूनकर और पीसकर तैयार किया जाता है। लौंग का औषधीय इस्तेमाल भी है। यह दांतो के दर्द उल्टी आदि में भी काफी काम आता है। अगर पहाड़ों की चक्करघिन्नी वाली यात्रा में आपको उल्टी होती हो तो लौंग चबाएं, आराम मिलेगा। 

हमलोगों ने स्पाइस गार्डन में सैर के दौरान काफी कुछ सीखा और समझने की कोशिश की। सुरम्य वातावरण में वहां एक हरी भरी दुनिया थी। हल्की बारिश ठंड बढ़ा रही थी।

केरल में मसालों की खेती का इतिहास तकरीबन पांच हजार साल पुराना है। पर अब यहां मसालों को लेकर अनुसंधान संस्थान भी खोले गए हैं। केंद्र सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की संस्था स्पाइस बोर्ड ऑफ इंडिया का मुख्यालय केरल के कोच्चि शहर में है। केरल के इडुक्की जिले में मसालों की खेती बड़े पैमाने पर होती है।

अकेले इडुक्की जिले में ही स्पाइस बोर्ड के 20 क्षेत्रीय कार्यालय खुले हैं। स्पाइस बोर्ड की सूची में कुल 52 तरह के मसालों के नाम हैं। ये अलग अलग तरह के पौधों के जड़, तना, पत्ती या फलों से प्राप्त होते हैं।

जब कोई केरल का व्यक्ति अपने बाहर के राज्य को दोस्तों रिश्तेदारों को कुछ उपहार देने की सोचता है तो सबसे पहले उसे मसालों की पोटली का ख्याल आता है। भला इससे बेहतरीन उपहार क्या हो सकता है।
 
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( SPICE OF KERALA, BLACK PEPPER, CARDAMOM, CINNAMON, CLOVE, MUNNAR ) 

Thursday, January 11, 2018

मुन्नार में चुनिए अपने बजट का होटल

सालों भर सैलानियों से गुलजार रहने वाले मुन्नार में अनगिनत होटल और होम स्टे हैं। हालांकि यहां ऊटी की तरह ज्यादा सस्ते होटल नहीं हैं। पर फिर भी आपकी जेब के अनुकूल हर बजट के होटल यहां मिल सकते हैं। होटलों का किराया कम से कम की बात करें तो 1200 रुपये प्रतिदिन से आरंभ होता है। कई जगह इससे भी सस्ता ऑफर आपको संयोग से मिल सकता है।

अगर आप मुन्नार जाने वाले हैं तो अच्छा होगा कि आप आनलाइन सर्च करके अपने लिए उपयुक्त होटल पहले ही बुक कर लें। बारिश के दिनों को छोड़कर ज्यादातर समय यहां सैलानी आते रहते हैं। इसलिए मुन्नार में कोई ऑफ सीजन नहीं होता।
जब हमने अपना होटल बदला -  मैं आमतौर पर जब भी परिवार के साथ निकलता हूं होटल पहले से ही बुक कर लेता हूं। आनलाइन बुकिंग का ये फायदा होता है कि आपको नई जगह में होटल तलाशने का समय बचता है। साथ ही आप रेलवे स्टेशन बस स्टैंड आदि के निकटतम स्थल पर होटल तलाश लेते हैं को टैक्सी आदि का खर्च भी बच जाता है। मुन्नार में हमने होटल बुक किया था मेक माईट्रिप से। उस होटल वाले का चार दिन पहले फोन आता है कि बुकिंग एजेंसी से हमें अभी तक आपकी राशि नहीं मिली है, तो मैं आपका स्टे रद्द भी कर सकता हूं। सालों से आनलाइन होटल बुक करने के बावजूद यह मेरे लिए पहली बार था। मैंने उनकी वेबसाइट के प्रतिनिधि से बात कराई। उनकी शंका का दूर हो गई। पर मेरा मन उस होटल वाले से खट्टा हो गया। सो मैंने रात में उस होटल को रद्द कर दिया। इसके बाद मैंने गोआईबीबो डाटकाम से दूसरा होटल बुक किया।

यह होटल था मुन्नार मेंसन। होटल पुराने मुन्नार में बस स्टैंड से चंद कदम की दूरी पर है। इसमें हमें महज 1400 रुपये प्रतिदिन में तीन जन के लिए कमरा मिला, कंटिनेंटल प्लान में। यानी सुबह का नास्ता साथ में। यह मुन्नार में काफी अच्छा सौदा था। होटल की बिल्डिंग में नीचे साउथ इंडियन बैंक की शाखा है। जब हम होटल पहुंचे तो जो कमरा हमें दिया गया वह आकार में काफी बड़ा था। उसमें टायलेट के अलावा बालकनी में स्टडी एरिया भी था।हालांकि होटल में चाय काफी रुम सर्विस नहीं है। पर वे सुबह का नास्ता बगल के रेस्टोरेंट से उपलब्ध कराते हैं। नास्ते में कई दक्षिण भारतीय विकल्प हैं। इनमें डोसा, इडली, उत्तम और दूसरे कई व्यंजन हो सकते हैं। साथ में चाय काफी और मिनरल वाटर की बोटल। तो मुन्नार मेंसन में तीन दिन का प्रवास उल्लास भरा रहा। वैसे मुन्नार में आफ सीजन में आपको 1000 – 1200 के भी कमरे मिल सकते हैं।

मुन्नार मेंसन के सामने होटल अबराड है। सफेद रंग के इस होटल के ऊपरी मंजिल के कमरों से मुन्नार का बहुत ही अच्छा नजारा दिखाई देता है। मुन्नार के मध्यम वर्गीय होटल में मुन्नार इन अच्छा विकल्प है। यह बिल्कुल बस स्टैंड के पास ही स्थित है। इसके नीचे होममेड चाकलेट की दुकाने हैं।
मुन्नार के महंगे होटलों में इस्ट एंड अच्छा विकल्प है। यह भी मुन्नार बस स्टैंड के पास ही स्थित है।

मुन्नार के बेहतरीन होटलों में ग्रीन रीज का नाम भी शामिल है। यह नए बस स्टैंड के काफी करीब है। इसमें रेस्टोरंट भी है। हमारे साथी रमन शुक्ला इसमें ठहर चुके हैं। मुन्नार में अगर आप चाय के बगानों के बीच ठहरना चाहते हैं तो ऐसे होटलों का भी चयन कर सकते हैं।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य
(MUNNAR, HOTEL, KERALA )

Tuesday, January 9, 2018

मोहिनीअट्टम और कथकली के देस में


केरल में जब आप घूम रहे हों तो यहां की दो शास्त्रीय नृत्य शैलियों की खूशबू से भला दूर कैसे रह सकते हैं। मोहिनीअट्टम और कथकली केरल की दो प्रमुख नृत्य शैलियां हैं। इनका प्रदर्शन आपको केरल के तमाम सांस्कृतिक आयोजनों में देखने को मिल सकता है। मुन्नार में हर शाम को दो छोटे छोटे आडिटोरियम में कथकली का प्रदर्शन होता है। इसका टिकट 200 रुपये का है। यहां दो शो होते हैं। शाम को 5 से 6 बजे तक कथककली का शो तो 7 से 8 बजे के बीच केरला मार्शल आर्ट का शो। आप समय निकाल कर इन शो का मजा ले सकते हैं। तो आइए जानते हैं इन नृत्य परंपराओं के बारे में।

जब विष्णु ने मोहिनी रुप धरा और छल से लिया अमृतकलश  


मोहिनीअट्टम केरल की सबसे पुरानी नृत्य शैली है। यह कथककली से भी प्राचीन मानी जाती है। मोहिनीअट्टम का शाब्दिक अर्थ मोहिनी  के नृत्य के रूप में लिया जाता है। मोहिनी का अर्थ मन को मोहने वाला होता है। कहा जाता है कि मोहिनी भगवान विष्णु का रुप है, जिसका अवतरण देव और असुरों के बीच युद्ध के दौरान हुआ था। जब असुरों ने अमृत के ऊपर अपना नियंत्रण कर लिया था। तब भगवान विष्णु ने मोहिनी का रुप धारण कर वो अमृत का घड़ा असुरों को मोह में लेकर देवताओं को समर्पित कर दिया था। तो इस तरह यह एक हिन्दू पौराणिक गाथा है जो नृत्य शैली में प्रकट हुई है।

मोहिनीअटट्म केरल के मंदिरों में हजारों सालों से किया जाना वाला नृत्य है। मोहिनी अट्टम एक  चक्करदार नृत्य शैली है। इसमें शरीर और शरीर के अंगों की मंथरललित गति एवं आंखों और हाथ की अत्यंत भावप्रवण भंगिमाएं देखने को मिलती हैं। इसे कई महिलाएं समूह में भी करती हैं। इस नृत्य रूप के लिए विशिष्ट वस्त्र विन्यास भी होता है। सोने की जरदोजी के काम वाले वस्त्र पहले महिलाएं इस नृत्य में हिस्सा लेती हैं।



मोहिनीअट्टम का उल्लेख केरल के साहित्यिक ग्रंथों में मज्हमंगलम नारायणन नम्बु‍तिरि द्वारा 1709 में लिखित व्यवहारमाला पाठ और बाद में महान कवि कुंजन नम्बियार द्वारा लिखित घोषयात्रा  में पाया जाता है। केरल के इस नृत्य रूप की संरचना त्रावणकोर राजाओं महाराजा कार्तिक तिरुनल और उसके उत्तराधिकारी महाराजा स्वाति तिरुनल (18वीं-19वीं शताब्दी ईसवी) द्वारा की गई थी। मोहिनीअट्टम की लोकप्रियता बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भिक दशकों में त्रिचुर और पालघाट जिलों तक सीमित थी। पर अब केरल के तमाम जिलों के शास्त्रीय नृत्य के स्कूलों मे इसका प्रशिक्षण दिया जाता है। केरल से बाहर जब भी केरल की नृत्य शैली को लेकर जाने की बात आती है तो मोहिनी अट्टम और कथकली का नाम आता है।

नौ रसों का अदभुत प्रदर्शन दिखता है कथककली में

अब केरल की एक और लोकप्रिय नृत्य शैली कथककली की बात करें। कथकली मोहिनीअट्टम की तुलना में नया है। कथकली नृत्‍य शैली केरल की प्राचीन युद्ध संबंधी कलाओं का मेल दिखाई देता है। एक दंतकथा के अनुसार जब कालीकट के जमोरिन ने अपने कृष्‍णानाट्टम कार्यक्रम करने वाले समूह को त्रावनकोर भेजने से मना कर दियातो कोट्टाराक्‍कारा का राजा इतना नाराज हो गया कि उसे रामानाट्टम की रचना करने का निर्णय लिया। उसी रामनाट्टम का का विकसित रूप है कथकली।  इस नृत्य में 24 मुद्राएं होती हैं। इसमें भरतमुनि के नव रस का सुंदर प्रदर्शन भी देखने को मिलता है। 



अत्यंत रंगीन वेशभूषा पहने कलाकार गायकों द्वारा गाए जानेवाले कथा संदर्भों को कलाकार हस्तमुद्राओं एवं नृत्य-नाट्यों द्वारा अभिनय करके प्रस्तुत करते हैं। इसमें कलाकार स्वयं संवाद नहीं बोलता है और न ही गीत गाता है।  आमतौर पर कथा के विषय को पुराणों और ऐतिहासिक कथानकों से लिया जाता है। केरल के मंदिरों के शिल्‍पों और लगभग सोलहवीं शताब्‍दी के मट्टानचेरी मंदिर के भित्तिचित्रों में वर्गाकार तथा आयताकार मौलिक मुद्राओं को प्रदर्शित करते नृत्‍य के दृश्‍य देखे जा सकते हैंजो कथकली की विशेषताओं को प्रदर्शित करते हैं।
- vidyutp@gmail.com 
(MOHINIATTAM, KATHAKKALI, MUNNAR, CLASSICAL DANCE OF KERALA ) 







Sunday, January 7, 2018

मुन्नार ग्राम पंचायत में आपका स्वागत है...

केरल का सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशन मुन्नार। दुनिया के दस बेहतरीन टूरिस्ट डेस्टिनेशन में शामिल है मुन्नार । पर ये मुन्नार है क्या। क्या कोई शहऱ। नहीं जी। ये तो केरल के थेकाडी जिले की एक ग्राम पंचायत है। यानी की अभी तक मुन्नार गांव ही है। नगर पंचायत का भी दर्जा नहीं मिला है। पर गांव है तो क्या हुआ, यह तो और भी अच्छी बात है। हमें मुन्नार के आटो वाले बताते हैं कि मुन्नार कभी केरल की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत हुआ करता था। पर अब इससे देवीकुलम तालुक के कुछ हिस्से अलग कर दिए जाने के बाद भी ग्राम पंचायत का दायरा बड़ा है।
कुल 187 वर्ग किलोमीटर में फैला मुन्नार अब भी इडुकी जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है।

मुन्नार ग्राम पंचायत का गठन 1961 में हुआ। इसमें कुल 21 वार्ड या बसावटे आती हैं। पर गांव है तो क्या हुआ। यहां पर राज्य सरकार की ओर से आधारभूत संरचनात्मक विकास के सारे काम किए गए हैं। सीमा में दो छोटे छोटे बस स्टैंड हैं।
संयोग से मैं जिस होटल में ठहरा हूं उसके पास ही एक मुन्नार ग्राम पंचायत भवन का विशाल दफ्तर है। इसी दफ्तर में मुन्नार से जुडे हुए सभी प्रशासनिक कार्य होते हैं। दफ्तर के बाहर गांधी जी की प्रतिमा स्थापित है। कई मामलों में मुन्नार का गांव का अस्तित्व बरकरार है। यहां पर बड़े बड़े शापिंग माल नहीं नजर आते। हालांकि तमाम लग्जरी होटल जरूर बन गए हैं। खाने पीने के रेस्टोरेंट भी हैं। हास्पीटल भी है। पर इन सबके बावजूद मुन्नार एक गांव ही है।

शब्दों के लिहाज से जाएं तो मुन्नार का मलयालम में मतलब तीन नदियों से है। कुंडाली, मुधारीपुजा और नालाथानी तीन नदियों के पास बसे होने के कारण इसका नाम मुन्नार पड़ा।
 मुन्नार का मुख्य इलाका ओल्ड मुन्नार है। इस इलाके में ही मुख्य बाजार और खाने पीने के स्टाल और होटल आदि हैं। वैसे कोचीन की तरफ से जाते समय ओल्ड मुन्नार  के बस स्टैंड से दो किलोमीटर पहले से ही बाजार आरंभ हो जाता है। अगर आपके पास अपना वाहन नहीं है तो आपको ओल्ड मुन्नार में ही किसी होटल में अपना ठिकाना बनाना चाहिए।

वैसे तो मुन्नार केरल का हिल स्टेशन है, पर यह पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में कोयंबटूर से पोल्लची और उदुमलाईपेट्टई के रास्ते जुड़ा है। केएसआरटीसी की बसें और निजी बसें भी मुन्नार को आसपास के राज्यों से जोड़ती हैं। आप यहां पर ऊटी, कोयंबटूर, मदुरै, कोडइकनाल आदि स्थलों से भी पहुंच सकते हैं।
केरल के स्थानीय लोगों की मातृभाषा मलयालम है। पर मुन्नार में लोग अंगरेजी और हिंदी भी खूब समझते और बोल लेते हैं। इसलिए यहां भाषा की कोई समस्या नहीं है।

मुन्नार में क्या देखें – फ्लावर गार्डन, मुट्टुपेटी डैम, एरावीकुलम नेशनल पार्क, अथाकुड वाटर फाल्स। चाय के बगान। स्पाइस गार्डन। कथककली का शो। कुंडाला डैम, टॉप स्टेशन, चित्रापुरम के चाय के बगान। मुन्नार में चाहे आप कितना भी वक्त गुजारें आपकी मर्जी है पर कम से कम तीन दिन जरूर यहां रहें तो अच्छा रहेगा।

1600 मीटर (5200 फीट ) की ऊंचाई पर स्थित है मुन्नार।

187 वर्ग किलोमीटर में है मुन्नार पंचायत का विस्तार

38 हजार के आसपास है मुन्नार पंचायत की आबादी

13 से 26 डिग्री के बीच रहता है सालों भर तापमान

- vidyutp@gmail.com
( MUNNAR , GRAM PANCHYAT,  IDUKI, KERALA ) 


Friday, January 5, 2018

कोचीन से मुन्नार – हरियाली के संग-संग

कोचीन से मुन्नार की दूरी 135 किलोमीटर है जो आप बस या टैक्सी से तय कर सकते हैं। निजी कार बुक करने पर आपको 3000 से 3500 तक देने पड़ सकते हैं। अलुवा से मुन्नार 120 किलोमीटर है जबकि कोचीन एयरपोर्ट से मुन्नार की दूरी 110 किलोमीटर ही है। एर्नाकुलम (कोचीन) या अलुवा से मुन्नार के लिए लगातार सरकारी और निजी बसें चलती हैं, पर अग्रिम आरक्षण कुछ वातानुकूलित बसों में ही होता है। पर आप समान्य बसों से भी मुन्नार तक का सफर कर सकते हैं। ये यात्रा कोचीन- अलुवा-कलाडी- कोठामंगलम-आदिमाली के बीच ब्रेक करके भी की जा सकती है।

कोचीन से मुन्नार के बीच हमारी बस आदिमाली में 20 मिनट के लिए रुकती है। आदिमाली से मुन्नार 28 किलोमीटर का सफर रह जाता है। यहां होटल जिन्नाह में हमलोग नास्ते के लिए रुके हैं। यह एक ऑन द वे साफ सुथरा सुंदर होटल है। खाने पीने के अलावा आवासीय होटल भी है। उल्टी के कारण अनादि और माधवी की तबीयत खराब हो रही है। हमलोग होटल में लेमन टी आर्डर करते हैं। होटल का स्टाफ हमें सोडा बोतल लेने की सलाह देते हैं। हम आधे लीटर की सोडा बोतल ले लेते हैं। लेमन टी से भी राहत मिली। हमारे पास इमली कैंडी भी है। वैसे पहाड़ों के चक्करघिन्नी वाले रास्ते में लौंग चबाना काफी उपयोगी रहता है, पर वह हमारे पास नहीं है।

हमारे केरॉस बस के कंडक्टर हमें नींबू के छिलके लाकर देते हैं। बताते हैं कि इसे लगातार सूंघते रहिए तो उल्टी की इच्छा दबी रह जाएगी। वाकई यह कारगर भी रहा।
केरॉस की बस में डिजिटल स्क्रीन भी लगी है। मुन्नार के सफर के दौरान उन्होंने दो फिल्में भी दिखाईं। एक फिल्म तो हमलोगों ने सफर के दौरान पूरी देख डाली। पर आदिमाली के बाद मुन्नार का सौंदर्य जवां होने लगता है इसलिए लगातार बाहर नजर घूमाते रहना बेहतर है। हमारे बस चालक महोदय बड़े संयत ढंग से बस को आगे ले जा रहे हैं।
हमलोग अपनी दाहिनी तरफ खासतौर पर चाय के विशाल बगान और मसालों के उद्यान देख रहे हैं। सितंबर महीने में बादलों का मौसम हो गया है। भले ही उत्तर भारत में मानसून जाने की घड़ी आ गई है पर यहां बारिशों का मौसम है। बस में सफर कर रहे सभी परिवार के लोग लगातार अपने कैमरे से मुन्नार की हरी भरी वादियों की तस्वीरें कैद करने में जुटे हैं। हम धीरे धीरे ऊंचाई की ओर बढ़ रहे हैं। सामने सड़क पर कई बार बादल तैरते नजर आ रहे हैं। हमारे साथ चले स्काटलैंड वाले युगल मुन्नार से 20 किलोमीटर पहले ही ब्लैक फारेस्ट में उतर जाते हैं। वास्तव में आदिमाली के बाद होटल और होमस्टे की श्रंखला आरंभ हो जाती है। अगर आपकी बुकिंग है तो बस के कंडक्टर को बता दें वह आपके होटल के निकटतम स्थान पर आपको उतार देगा। वास्तव में मुन्नार के कई दर्शनीय स्थल कोचीन रोड पर भी हैं।

केरॉस की बस हमें हाइडिल पार्क के बाद बने निजी बस स्टैंड पर उतार देती है। यह बस मुन्नार बाजार में बने मुख्य बस स्टैंड तक नहीं जाती है। हमारा होटल मुन्नार मेंसन मुख्य बस स्टैंड के पास है। आटो रिक्शा वाला 30 रुपये लेता है हमें होटल तक छोड़ने के लिए। होटल का विशाल सूट नुमा कमरा हमारा इंतजार कर रहा था।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य  
(MUNNAR, ADIMALY, BUS, HOTEL MUNNAR MANSION)